Tuesday, 23 December 2014

महिला नेता भी होती हैं छेड़छाड़ का शिकार



पूजा मेहरोत्रा


चुनावी मौसम में महिला सुरक्षा एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है। सभी पार्टियां महिलाओं की रक्षा और सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े वायदे कर रही हैं। इन दावों पर उस समय सवालिया निशान लग जाता है जब इस तरह की खबर आने लगती है कि मेरठ में कांग्रेस की महिला प्रत्याशी नगमा के साथ उनके ही दल के विधायक गजराज सिंह ने अभद्र व्यवहार किया। वीडियो में महिला प्रत्याशी के साथ उन्हें जबरदस्ती करते हुए देखा जा रहा है लेकिन न तो उनकी पार्टी ने और न ही महिला नेता ने उस मनचले नेता के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का इरादा जाहिर किया है।
यह जरूर हुआ है कि नगमा ने अपने इर्दगिर्द बॉडीगार्ड रख लिए हैं। चूंकि वह कांग्रेस की प्रत्याशी हैं और फिल्म अभिनेत्री भी हैं लिहाजा उनके पास रुपये, पैसे की कोई कमी नहीं है, वह दो बॉडीगार्ड क्या चार-पांच, दस-बारह, या अनगिनत बॉडीगार्ड रख सकती हैं। महिला प्रत्याशियों की सुरक्षा के लिए पार्टी और चुनाव आयोग भी बॉडीगार्ड दे सकता है लेकिन बात तो आम महिलाओं, बच्चियों की सुरक्षा का क्या होगा? उनकी सुरक्षा कैसे होगी? जब पुरुष विधायक और पार्षद ही मनचले हैं, महिला प्रत्याशियों से छेड़छाड़ करते हैं, उनके लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं, उनकी त्वचा को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां करते हैं, भीड़ का फायदा उठाकर उनके शरीर का स्पर्श पाने का कोई मौका नहीं गंवाते हैं तो ये नेता कैसे करेंगे महिलाओं की रक्षा?
नगमा कहती हैं कि उनके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई फिर अचानक उनकी सुरक्षा के लिए बाउंसर क्यों आ गए? मगर नगमा से छेड़खानी यहीं खत्म नहीं हुई। इस घटना के महज दूसरे दिन पैदल यात्रा के दौरान एक युवक ने उनसे अश्लील हरकत की तो उन्होंने उस शख्स को थप्पड़ जड़ दिया, लेकिन न तो उस शख्स को गिरफ्तार कराया और न ही उसे बेइज्जत किया। लेकिन अब छेड़छाड़ से आजिज नगमा कहती हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि महिला नेताओं के लिए चुनाव कठिन समय होता है, देर शाम तक मीटिंग में बैठना भी मुश्किल होता है। वे जोर देते हुए कहती हैं कि मेरठ में कानून-व्यवस्था सुधारने की बहुत जरूरत है।
इन दिनों टीवी पर भाजपा का विज्ञापन खूब आ रहा है। विज्ञापन में एक महिला डरा हुआ चेहरा लिये यह कहती हुई नजर आती है कि ‘बेटियों की रक्षा न करने वालो! देश तुम्हें माफ नहीं करेगा।’ इसके बाद वोट देने की अपील की जाती है। क्या भाजपा सरकार के आते ही महिलाएं सुरक्षित हो जाएंगी? मथुरा से भाजपा प्रत्याशी भूतपूर्व ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी पहले से ही राजनीति में हैं और वे छेड़छाड़ से बखूबी वाकिफ भी हैं। शायद यही वजह है कि वे मथुरा में रोड शो के दौरान अपनी ऑडी कार से उतरती ही नहीं हैं। वे कहती हैं, ‘मैं एक औरत हूं और सेलीब्रिटी भी, इसलिए मैं भीड़ में उतर नहीं सकती।’ पिछले दिनों जब वे मथुरा कचहरी में पर्चा दाखिल करने पहुंची तो वहां मौजूद काले कोटधारियों की भीड़ हेमा मालिनी पर फिकरे कसती सुनी गई जबकि कई लोग मौका देख उन पर हाथ फेरने की बात करते सुने गए। महिला प्रत्याशियों के साथ छेड़छाड़ की इन घटनाओं के बाद चुनाव आयोग ने उन्हें अधिक सुरक्षाबल देने की बात कही है। चुनाव आयोग ने इन महिला प्रत्याशियों को तो विशेष सुरक्षा दे रहा है। दो बार रामपुर से सांसद रही अभिनेत्री जया प्रदा के साथ तो उनके प्रतिद्वंद्वियों ने और भी बुरा किया।
जया ने जब समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ दिया और अमर सिंह के साथ अलग होकर 2009 में रामपुर से चुनावी मैदान में फिर से उतरी थीं तो उन्हें बदनाम करने के लिए चेहरा बदलकर उनकी अश्लील सीडी रामपुर में बांटी गई। सीडी बांटने का अरोप उनके प्रतिद्वंद्वी सपा प्रत्याशी आजम खां पर लगाया गया। पिछले दिनों इन्हीं आजम खां ने उन्हें एकबार फिर ‘रक्काशा’ (नचनिया) तक कह डाला था। जबकि उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के लिए सोशल मीडिया पर तरह-तरह के चुटकुले तो बनाए जाते हैं लेकिन पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी नाहिद हसन ने शामली कैराना के पार्टी कार्यालय के उद्घाटन के दौरान मायावती पर नरेंद्र मोदी की गोद में बैठने से लेकर इतनी अभद्र बात कही थी कि उसे आम बोलचाल में लिखा नहीं जा सकता है।
चंडीगढ़ से ‘आप’ की प्रत्याशी गुल पनाग की फोटो मार्च के शुरू में ही अश्लील फोटो लगा दी गई। यह सब तकनीक का कमाल था। इसी समय शिवसेना के प्रत्याशी और लोकसभा सांसद आनंद अडसुल ने दक्षिण भारतीय अभिनेत्री, एनसीपी प्रत्याशी नवनीत कौर राना के चरित्र पर अभद्र टिप्पणी की। दोनों ही एक एसटी बस में टीवी शो के लिए अमरावती जा रहे थे और शो का सीधा प्रसारण हो रहा था। नवनीत ने अडसुल पर आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के लिए वे किसी भी हद तक असंवेदनशील हो सकते हैं। इससे पहले अडसुल पर महिलाओं की फोटो को तकनीक की सहायता से अश्लील बनाकर इंटरनेट पर डलवाने का आरोप भी लग चुका है। इस पर अडसुल ने कहा कि ‘जो महिलाएं चरित्रवान हैं, मैं उनका आदर करता हूं।’ तमिलनाडु में चुनाव लड़ रहीं छह महिलाओं में से एक, ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमन एसोसिएशन की यू. वासुकी कहती हैं कि ‘अभिनेत्रियां फिल्मों में कोई खास किरदार निभाती हैं तो कुछ लोगों को लगता है कि वे महिलाओं को एक चीज के तौर पर देख सकते हैं।’
उल्लेखनीय बात यह है कि महिला प्रत्याशी गांवों में अपने आपको काफी सुरक्षित महसूस करती हैं। नगमा कहती हैं कि गांव की भीड़ अधिकतर उनसे अच्छा व्यवहार करती है। कन्याकुमारी से ‘आप’ के प्रत्याशी, परमाणु अस्त्र विरोधी कार्यकर्ता एस.पी. उदय कुमार के लिए प्रचार में जुटीं उनकी पत्नी का कहना है कि उनके समूह के २५ लोगों में अधिकतर पुरुष हैं जो काफी संवेदनशील हैं, जबकि दो महिलाओं ने लोगों को परेशान कर रखा है।