Monday, 8 June 2015

तानाशाह नहीं लाचार, बेचारा, मुसीबतों का मारा

‘आप’का समय पांच साल बस
पूजा मेहरोत्रा
मुख्‍यमंत्री केजरीवाल मुझे तानाशाह तो कभी नहीं लगे अलबत्‍ता उनमें मुझे एक बहुत लाचार, बेचारा और मुसीबतों से घिरा मुख्‍यमंत्री नजर आता है। अभी केंद्र, उपराज्‍यपाल और मीडिया से उनकी लड़ाई चल ही रही थी कि दुबारा सफाई कर्मचारियों ने उनका चुनाव चिन्‍ह उठाने से मना कर दिया है। अब वह चिढकर एक बार फिर केंद्र बीजेपी और भ्रष्‍टाचार के पीछे पड गए हैं। पांच महीनों में जिस तरह से केजरीवाल फलॉप साबित हो रहे हैं समझ नहीं आता कि पांच साल ये सरकार काम कैसे करेगी। अब उन्‍ेहोंने नया जुमला छोडा है केंद्र से मांगो सैलरी। क्‍या सफाइ कर्मचारियों को सैलरी, डीटीसी बस वालों को सैलरी,टीचर को सैलरी अब केंद्र सरकार ही देगी। जिस तरह से पांच महीनों में दो दो बार दिल्‍ली कचडा का ढेर बनी है और सफाई कर्मचारी हडताल पर गए हैं इसके पीछे केजरी जी की नाकामी साफ साफ नजर आ रही है। मत कहिए कि एमसीडी बीजेपी की है। सफाईकर्मचारियों के झाडू न उठाने के पीछे भी केंद्र सरकार और उपराज्‍यपाल हैं।
वोट देकर दिल्‍ली ने आपको जिताया है जवाब आप देंगे। कैसे देंगे, क्‍या करेंगे आप जानिए। हमें साफ सुथरी, हरी भरी दिल्‍ली चाहिए। आपसे पहले कई मुख्‍यमंत्री रह चुके हैं। शीला सरकार के समय भी बीजेपी की ही एमसीडी थी लेकिन सैलरी को लेकर दिल्‍ली को कचरे के ढेर में बदलते हुए मैंने 18 सालों में नहीं देखा। अगर 5 महीने में दिल्‍ली के ये हालात हैं तो पांच साल में क्‍या होने वाला है। सोच कर ही दिल घबराने लगा है। अब आप समझ चुके होंगे कि केजरी के बेचारा, लाचार लगने की वजह उपराज्‍यपाल नजीब जंग से जंग बिलकुल नहीं है। यह तो होना ही था और होता भी रहा है। मदनलाल खुराना के समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और शीला दीक्षित के शुरुआती दौर में केंद्र में भाजपा की सरकार थी। ऐसी कई मुसीबतें दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्रयिों ने भी झेली ही हैं। लेकिन दिल्‍ली का हाल बेहाल पहली बार देखा जा रहा है। अपनी लड़ाई को वे जनता तक आने ही नहीं देते थे।
केजरी साहब जोश में बार बार होश खो देते हैं। वो भूल जाते हैं कि वो एक्टिविस्‍ट नहीं है अब वे ही मुख्‍यमंत्री हैं। केंद्र से लेकर मीडिया तक से तो उन्‍होंने जंग छेड ही रखी है। बिजली कंपनियां चोर तो पहले से हैं सभी जानते हैं लेकिन चोर से चोरी कबूल कराने के लिए हमेशा थर्ड डिग्री नहीं आजमाया जाता बल्कि चालाकी, सूझबूझ से काम करना होता है। कल तक हर झुग्‍गी झोपड़ी में बिजली पहुंचती थी अब कुछ वीआइपी इलाकों को छोड़ दें तो बिजली के हालात पर कुछ कहने की जरूरत नहीं है। केजरीबाबू के सबसे बड़े वोट बैंक वाले ही सबसे ज्‍यादा परेशान किए जा रहे हैं। मदनपुर खादर से लेकर सीमापुरी की झुग्‍गी बस्तियों तक बिजली की कटौती बदस्‍तूर जारी है। न मीडिया में बात आ रही है और केजरीबाबू के कान को तो सिर्फ केंद्र से जंग ही सुनाई देता है।
 हयूमन नेचर है कि आप जब नई व्‍यवस्‍था में जाते हैं तो चीजें समझने में समय लगता है। ऐसे में यदि थोड़ा नरम रहकर चीजें सीख लें और जब सीख लें तब बवाल काटें। तब जीत के चांसेज आपके ज्‍यादा होते हैं। केजरी के जोश में होश खोने का फायदा केंद्र और उपराज्‍यपाल साहब उठाने में लगे हैं। ।  केजरी को समझना होगा कि जनता को आपकी इस सांप नेवले की लड़ाई से कोई लेना देना नही है। उसने आपको चुना है और उसे उसका परिणाम चाहिए। जो उसे कहीं देखने को नहीं मिल रहा है। चंद सजग ऑटो वालों को छोड़ दे तो केजरी सरकार के बाद सारे खुद को मुख्‍यमंत्र‍ि से कम नहीं समझते हैं। गलती करते हैं और धौंस भी देते नजर आ जाते हैं।

भरी महफिल में इंसान से इंसान का हो भाइचारे का पैगाम देने वाले केजरी बाबू ही भाइचारा संभाल नहीं पा रहे हैं। पहले अपनी पार्टी में योगेन्‍द्र यादव, प्रशांत भूषण, साजिया इल्‍मी सहित कई के साथ जंग छेड दी और फिर जंग साहब से ही जंग का ऐसा ऐलान कर दिया है कि खत्‍म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। एसीबी का मामला हो या फिर आइएएस अफसरों की नियुक्ति का मामला जनता को इस राड से कोई मतलब नहीं है। अपने आपको जनता के सामने बेचारा दिखाना बंद कीजिए। बिजली बिल और पानी के बिल को कम कर देने से जनता खुश तो बहुत है लेकिन मुख्‍यमंत्री की जिम्‍मेदारी बस इतनी ही नहीं होती है। ये बात न तो उन्‍हें अपने पहले 49 दिन के कार्यकाल में समझ आई थी और न अब दूसरी इनिंग में ही समझ आ रही है। जिसतरह आपने मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेते ही शहर के चौक चौराहों से अपनी पसीने से लथपथ पोस्‍टर हटवाकर मुस्‍कुराते मुख्‍यमंत्री वाले पोस्‍टर लगवाए थे। वैसे ही मुस्‍कुराइए और काम पर जाइए। आप हममें से एक नहीं हैं। आप आम आदमी के सरदार हैं।