Friday, 13 February 2015

‘आप’का समय शुरू होता है अब


हर लहर एक तरफ केजरीवाल पांच बरस
पूजा मेहरोत्रा

खबर आ रही है कि अरविंद केजरीवाल तेज बुखार हो गया है। अब समय मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बुखार लगने का तो  रहा नहीं, अब तो भ्रष्‍टाचार, महंगाई, बिजली-पानी विभाग में बैठें लोगों को, सफाई कर्मचारियों, निजी स्‍कूलों में एडमिशन के नाम पर मनमानी कर रहे प्रशासनों को, कालाबजारी में मशगूल लोगों को बुखार लगाने का समय है। उनके जल्‍द स्‍वास्‍थ्‍य की कामना करते हुए मैं उनसे बस यह कहना चाहती हूं डर के आगे जीत है। वैसे यदि आपको उम्‍मीद से ज्‍यादा कुछ मिल जाए तो डरना स्‍वभाविक भी है। पिछले एक साल से आप पार्टी के कार्यकर्ताओं की मेहनत का फल दिल्‍ली की जनता ने उम्‍मीद से ज्‍यादा देकर डरा दिया है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी का शासन काल खूब देख चुकी दिल्‍ली की जनता को जिसका इंतजार था वह केजरीवाल ही है। दिल्‍ली की जनता एक ऐसा कृष्‍ण चाहती थी जो उसे सुने, समझे, जाने ही नहीं पहचाने भी। लोगों में यह विश्‍वास भरने में केजरीवाल जी सौ फीसदी सफल हुए और सफलता कुछ ऐसी थी कि ‘सारी लहर एक तरफ केजरीवाल पांच बरस

केजरीवाल भी जानते हैं और जनता भी कि विश्‍वास और प्‍यार से पेट नहीं भरता, समस्‍याएं खत्‍म नहीं होती, महंगाई कम नहीं होती। तो ‘आप’का समय शुरू होता है अब। बिजली हाफ पानी माफ का नारा देने वाली इस सरकार को आने वाले दिनों में कई-कई चुनौतियों का सामना करने के लिए कमर कस कर तैयार हो जाना चाहिए। बिजली हाफ पानी माफ, वाइ फाई फ्री देना अगर इतना आसान होता तो 15 साल से राज कर रही शीला सरकार अपनी कुर्सी पावर बचाए रखने के लिए इसे बहुत आसानी से मुहैया करा सकती थी। बिजली से लेकर पानी तक के लिए दूसरे राज्‍यों पर निर्भर रहने वाली दिल्‍ली कैसे यह मुहैया कराएगी यह सोचने की बात है। 49 दिनों के लिए इस तरह की योजना लागू कर देना तो आसान था लेकिन बात जब पांच साल की हो और बहुमत में हो तो? दिल्‍ली में रोजाना 435 करोड़ लीटर पानी की जरूरत है उसमें भी 316 करोड़ लीटर ही पानी की सप्‍लाई हो पाता है। ये वो आंकड़े हैं जो अनाधिकृत कलोनियों और सोसाइटी के लिए मुहैया कराए जाते हैं। कई झुग्गियां और बस्‍ती ऐसी है जहां रहने वाले पानी कैसे मैनेज करते हैं यह टैब खेालकर दाढ़ी बनाने वालों के लिए सोचपाना भी मुश्किल है। वैसे तो इस शहर की हर समस्‍या बहुत बड़ी है क्‍योंकि यह देश की राजधानी है। बस मार्च से बिजली और पानी की मांग बढ़ जाएगी। दिल्‍ली में बिजली पानी की तरह ही बड़ी समस्‍या है। रोजाना 5600 मेगावॉट की खपत करने वाली दिल्‍ली को किसी तरह से खींचतान कर 5200 मेगावॉट बिजली ही उपलब्‍ध हो पाती है। वैसे बवाना इलेक्‍ट्रीशिटी प्‍लांट में बिजली उत्‍पादन का काम जल्‍द ही शुरू होने वाला है उसके बाद भी बिजली बिल हाफ करने के लिए सरकार क्‍या और कैसे कदम उठाएगी यह देखने लायक होगा। क्‍योंकि दिल्‍ली का विकास करना भी एक मुद़दा है।   

  इस शहर की एक और सबसे बड़ी समस्‍या पर नजर डालें तो वह महिला सुरक्षा है। सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने की बात आप ने की है। 15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगा देने भर से यदि महिला सुरक्षित हो जाती है तो इससे बड़ा आश्‍चर्य क्‍या होगा। वैसे केजरीवाल की आप भी नसीब वाली सरकार साबित होने जा रही है राजधानी में चल रही डीटीसी बसों में सीसीटीवी कैमरा लगना शुरू हो चुका है। इसमें एक पैनिक बटन भी लगाया गया है। जिसका संचालन ड्राइवर के हाथों में रहेगा। पैनिक बटन दबाते ही बस के अंदर का हाल कंट्रोल रूम में सिर्फ दिखाई ही नहीं देगा बल्कि वहां सायरन बजेगा जिससे बस में खतरे की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने का काम कंट्रोल रूम से किया जाएगा।  पिछले दिनों मैं जितनी भी हरी और लाल बसों में चढ़ी उसमें सीसीटीवी लगा देखा। लेकिन यह कैमरा महिला की सुरक्षा किस तरह से करेगा ये बडा सवाल है। क्‍योंकि वारदात करने वाले तो सिर्फ वारदात करते हैं अंजाम से कहां डरते हैं। फिर भी आज के लिए बस इतना। ‘आप’ने अपने मेनिफेस्‍टो में 70 तरह के वादे किए हैं। एकदम से सबकुछ बदल जाने की उम्‍मीद करना तो गलत होगा लेकिन फिर भी छप्‍पड फाड़ कर उम्‍मीद तो लगाई ही जा सकती है। एक बार पूरी ‘आप’की टीम को बधाई। ‘आप’का समय शुरू होता है अब।