Monday, 13 July 2015

कहीं आप तो नहीं बना रहे बच्‍चों को जिददी

कहीं आप तो नहीं बना रहे बच्‍चों को जिददी
पूजा मेहरोत्रा
आजकल हर मां बाप की एक ही शिकायत है बच्‍चे बहुत जिददी हो गए हैं। हम तो चार चार भाई बहन है मजाल है हमने कोई ऐसी जिदद पाली हो। हमें तो अपनी मां की आंख पढना आता था, पापा की खांसी सुनकर ही हम सभी भाई बहन घर के किसी कोने में दुबक जाते थे। हम तो इतना डरते थे लेकिन आज की जेनरेशन तो बाप रे बाप। लेकिन क्‍या आपने अपने आप पर नजर डाली कि आप क्‍या कर रहे हैं बच्‍चों के साथ।
कहीं आप तो नहीं बना रहे बच्‍चों को जिददी
क्‍या सचमुच आज के बच्‍चे जिददी हो रहे हैं या पैरेंट्रस ही उन्‍हें जिददी बना रहे हैं। महानगर हो या फिर गांव बच्‍चा एक ही अच्‍छा का श्‍लोगन है और एक ही बच्‍चे को बेहतरीन शिक्षा दीक्षा दी जा सकती है ऐसी सोच हावी है। और जब एक ही बच्‍चा है तो उसकी सारी मांग माननी है, बचपन में आप किन किन चीजों के लिए तरसे हैं वह कमी आप अपने बच्‍चे को नहीं होना देना चाहिते हैं और बच्‍चा हो जाता है जिददी। पैरेट कहते हैं कि बच्‍चे डिमा‍डिंग हो रहे हैं, क्‍या सचमुच बच्‍चे डिमांडिंग हो रहे हैं या आप उन्‍हें डिमांडिंग बना रहे हैं। बच्‍चो के लिए आपके पास समय नहीं है। तो बच्‍चे कहीं व्‍यस्‍त रहें आप उनकी हर जायत और नाजायज मांग पूरी कर रहे हैं। आपको अपना काम निपटाना है, बच्‍चे ने आपसे एक दो बार उस व्‍यस्‍त समय में कुछ मांग रखी और आपने पीछा छुडाने के लिए उसकी मांग कितनी जरूरी है बिना जाने समझे मान ली। बच्‍चे ने घर में आए गेस्‍ट के सामने कोई मांग रखी मेहमानों में आप इतने व्‍यस्‍त हैं कि मांग क्‍या है उसकी कितनी जरूरत है बिना जाने समझे कर दी मांग पूरी। बाजार में, दुकान के सामने कुछ मांग की आपने भी आव देखा न ताव कर दी जिदद पूरी।  
छोटा है तभी जिददी है
बच्‍चे ने आपसे किसी चीज की मांग की आपने शुरू शुरू में छोटा है कह कर हर चीज उसे पकड़ाते गए लेकिन जब उसकी मांग बढने लगी तो आपको वो डिमांडिग लगने लगा। अगर बच्‍चे ने किसी बात को लेकर ज्‍यादा जिदद कर दी तो आपने क्‍या किया आव देखा न ताव जड दिया तमाचा। ऐसा करते हैं न। याद कीजिए अपना बचपन, क्‍या आपकी सारी मांगे पूरी कर दी जाती थीं। क्‍या एक ही समय में आप सभी भाई बहनों की मांग पूरी कर दी जाती थी या एक बार में किसी एक भाई या बहन की मांग पूरी की जाती थी। तो ये आपको सोचना है कि आपका एक बच्‍चा हो या दो या फिर तीन आपको उसकी कितनी मांगे माननी है और कितनी नहीं। और जब मांग पूरी नहीं करनी है तो उन्‍हें किस तरह से हैंडल करना है।
जब बच्‍चे जिददी हो जाएं
बच्‍चों को जिददी कहने से पहले अपनी हरकतों पर भी ध्‍यान दीजिए। कहीं आपकी आदतें और जरूरत से ज्‍यादा कंसर्न ही उन्‍हें जिददी तो नहीं बना रही है। अब आती है कि बच्‍चा किस समय और किस चीज की मांग कर रहा है। ये आपको ध्‍यान रखना है कि बच्‍चा जिस खिलौने और चीजों की जिदद कर रहा है वह उसके विकास में कितना भागीदार साबित होने वाला है। जब तक उसे समझ नहीं थी और वे अक्‍सर चिप्‍स, कुरकुरे, खिलौने आदि की जिदद करते थे तभी यदि आपने रोक लगानी शुरू कर दें तो आपको उसके बड़े होने पर आप उसे डिमांडिग और जिददी नहीं कहेंगे और वे भी वैसे ही आपकी आंखों की भाषा समझेंगे जैसा आप अपने बचपन में अपने मां पापा की समझा करते थे।
बच्‍चे अगर जिददी हो रहे हैं तो पहले आप दोनों यानि पति पत्नि एक मत हों कि आपको उनकी क्‍या बात माननी है और क्‍या नहीं। अक्‍सर ऐसा देखा गया है कि मां जिन बातों के लिए मना करती है पिता बच्‍चे की वह जिदद पूरी कर देते हैं जिससे बच्‍चों के मन में मां के प्रति अविश्‍वास से भरने लगता है। और जब वही बच्‍चा फिर किसी बात की जिदद पिता से करता है और पिता को वो बात नागवार गुजरती है तो वो न भीड देखना है बाजार पत्‍नी पर चिल्‍लाता है कि कैसी आदतें डाल दी हैं तुमने बच्‍चे में। और दोनों ही हालात में फंसती मां है।  ऐसे में बच्‍चे को पहले दिन से परिस्थ्ति के अनुरूप ढालने की कोशिश करें।
जिदद में उसकी क्रिएटिविटी को तलाशें
कई बच्‍चे जिदद करते हैं तो रोते हैं, कुछ बच्‍चे बीच बजार में ही सड़क पर लोटने लग जाते हैं। कुछ तो हिंसक हो जाते हैं या तो वे अपना मुंह नोचने लगते हैं या मां पापा पर ही हाथ चलाने लग जाते हैं। जब आपके बच्‍चों में ऐसी आदतें विकसित हो रही हों या होने से पहले ही अपने बच्‍चे की क्रिएटिविटी को पहचाने। इस बात का खास ध्‍यान रखें कि उसकी पसंद क्‍या है। डिमांड कितनी भी जरूरी क्‍यों न हों आप न तो कहें ही बल्कि उनकी जिदद पूरी करने की एवज में उनसे हर वो काम करवाएं जो उसकी
क्रिएटिविटी को बढाता हो।
आज के नन्‍हें नन्‍हें बच्‍चे बेहतरीन कपड़े पहनना चाहते हैं, शीशे में खुद को निहारना उनकी आदतों में शुमार हो चुका है। ऐसे मे ंयदि कोई बच्‍चा जंक फूड और चॉकलेट आदि की मांग करता है तो पहले उसे रोटी, दाल सब्‍जी आदि की पौष्टिकता से अवगत कराइए। भरपूर विटामिन, प्रोटीन युक्‍त भोजन कैसे उन्‍हें आकर्षक, स्‍मार्ट और इंटेली‍जेंट बनाएगा इसकी जानकारी दीजिए। हां इस बात का ध्‍यान अवश्‍य रखिए कि आप उन्‍हें ये काम कर लोगे तो ये ला दूंगी या वो काम करने पर ये ला दूंगा। अच्‍छे नंबर लाने पर साइकिल मिलेगी, रिमोट वाली कार मिलेगी। भूल कर भी ऐसा लालच मत दीजिए। ऐसा कोई भी प्रलोभन उसे न केवल जिददी बनाएगा बल्कि अपनी मांग पूरी करने के लिए बस वह उतना ही काम करेगा जितने में आप खुश होकर उसकी उस मांग को पूरा कर देंगे।
हां शुरू से ही बच्‍चों के शौक का ध्‍यान रखिए। म्‍यूजिक, डांस ही नहीं चीजों को तोड़ फोड कर उसे नया रूप देना कई बच्‍चों की आदत होती है। कई बच्‍चे पेंटिंग के शौकीन होते है। कई बच्‍चे मिमिक्री बहुत अच्‍छी करते हैं। कई बातों बातों में जुगलबंदी कर डालते हैं। कइयों को बातें बनाने की आदत होती है, बैठे बैठे बातें मनवाने के लिए पूरी कहानी ही गढ डालते हैं। तो क्‍यों न उनके गुस्‍से और जिदद में उनकी इन आदतों को शुमार कर दिया जाए। अगर बच्‍चा होम वर्क कर या फिर पढाई के बाद टीवी देखना चाहता है या फिर दोस्‍तों के साथ खेलना चाहता है तो जाने दीजिए। कई बार अच्‍छी बातें टीवी भी सिखाती हैं और बाहर वाले भी और आस पास का माहौल भी।

यदि आपसे बच्‍चा बात बात पर पैसे की मांग करने लगा है खास कर टीन एज में ज्‍यादा होता है तो एक पॉकेट मनी बांधिए। और किसी भी हाल में पॉकेट मनी खत्‍म होने के बाद उसे पैसे नहीं देने है ये बात गांठ बांध लें। इससे बच्‍चे मनी मैनेजमेंट तो सीखते ही हैं वे पैसे की कीमत तक समझ पाते हैं। हां एक और महत्‍वपूर्ण बात एक समय में एक ही जने डांटे। और जब एक डांटे तो दूसरे को उसके सामने उसे बचाने से बचना चाहिए और एक दूसरे की शिकायत करने से भी बचना चाहिए। अगर आप एक दूसरे की शिकायत करते रहेंगे तो बच्‍चा आप दोनों को ब्‍लैकमेल कर  अपना फायदा और मांग पूरी करना शुरू कर देगा।