Monday, 1 February 2016

ताकि बच्चे बने आज्ञाकारी



पूजा मेहरोत्रा
 कई कई बार देखने को मिलता है कि बच्चे अपने माता पिता की बात नही सुनते है। जैसे जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं वैसे वैसे वे अपने बड़ों की बातों को सुनकर अनसुना कर देते हैं। अक्सर ऐसा बच्चे मां के साथ ज्यादा करते हैं। कई बार बच्चो की इन आदतों की वजह से अभिभावको को अपने रिश्तेदारों जानपहचान वालों के सामने शर्मिंदा भी होना पड़ता है। बच्चे माँ बाप से झगड़ा करते हैं और माँ बाप बच्चे की इस तरह की आदतों से परेशान होने लगते हैं।
बच्चे जब तक छोटे होते हैं तो उनका गुस्सा उनकी गलत आदतें सभी को प्यारी लगती है। लेकिन यही गुस्सा और बड़ों की बात ना मानना बढ़ती उम्र के साथ बुरा लगने लग जाता है। ऐसे में माँ बाप के लिए जरुरी हो जाता है कि वे अपने बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाएं। बच्चो को सिखाए कि वे बड़ों की इज़्ज़त करें और उनका कहना माने।
बच्चो को यह एहसास दिलाना होगा कि बड़े उनका बुरा नहीं चाहते हैं। बिना बड़ों की बात मानें वे न तो अपनी ज़िन्दगी में अच्छे से पढ़ पाएंगे और ना आगे बढ़ पाएंगे। इसलिए अपने बच्चों को आज्ञाकारी बनाने के लिए सिखाएं और खुद भी पालन करें

बच्चे अगर बात बात पर जिद करते हैं और उन्हें बार बार समझाने पर भी कोई बात समझ नही आ रही है तो आप शांत रहे, गुस्सा न करें और न चिल्लाएं। कोई बात समझानी है तो शांत रह कर समझाएं, गुस्से या जबरदस्ती से नहीं। वरना बच्चा और भी जिद्दी होता चला जाएगा।

इज़्ज़त देना :-
दूसरो की इज़्ज़त करना महत्वपूर्ण गुण है। और यह आदत बच्चे अपने माँ बाप या अपने आस पास के माहौल से ही सीखते हैं। इसलिए यह बहुत जरुरी है कि जो आप अपने बच्चों को जो भी सिखाना चाहते हैं, पहले उस पर ख़ुद अमल करना होगा। क्योंकि अगर आप अपने बड़ों की इज़्ज़त करेंगे तो यही चीज़ आपके बच्चे भी आपको करते हुए देख कर सीखेँगे।
अगर आप बात बात पर चिल्लाते हैं, बच्चों के सामने बड़े बुजुर्ग की बातों को बात बात पर काटते हैं या फिर उनकी इज्जत नही करते हैं तो आपको देख कर आपके बच्चे आपके साथ ऐसा ही व्यवहार करने लगते हैं। वे अपनी बात मनवाने के लिए हर हथकंडे अपनाते हैं। यह हरकते कभी कभी इतना भयानक रूप ले लेती है कि बात तक हाथ से निकल जाती है। बच्चे गलत राहों तक पर निकल जाते हैं।
 आदर करना :-
बच्चे को आज्ञाकारी कैसे बनाये? इसके लिए जरुरी है कि आप बच्चे के लिए कुछ नियम बनाएं जिसे बच्चा माने। लेकिन ख्याल रखें कि नियम ज्यादा नर्म ना हों, नहीं तो बच्चे इसको सिर्फ एक खेल की तरह लेंगे और जब मन करेंगे तब नियमों को तोड़ देंगे।इन दिनो मां बापऔर परिवार वालों की आज के बच्चे बड़ो का आदर नहीं करते हैं। अपने इर्द गिर्द देखिए कि आपका बच्चा इन दिनो किन बच्चो और लोगो के बीच उठ बैठ रहे हैं। आपका अपने बड़ो के प्र ति व्यवहार कैसा  है। अगर आप घर में बुजुर्गो महिलाओं और बचचो के साथ व्यवहार ठीक नही रखेंगे यकीन मानिए बच्चे आपसे ही आदते सीख रहे है।
घर मे बड़े बुजुर्गो का धयान रखने के साथ उनकी छोटी मोटी जरुरतो का धयान रखना, चलने फिरने मेो तकलीफ हो या न हो उनहे सहारा दे ने के लिए हाथ बढ़ाना, महिलाओ बुजुर्गों को यदि आप बैठे हैं तो बैठने के लिए सीट ऑफर करना आदर की निशानी मानी जाती है।
4) इनाम देना :-
जब भी आपका बच्चा आपकी बात माने तो उसे कुछ उपहार में दें, इससे बच्चे को प्रोत्साहन मिलेगा। लेकिन ध्यान रहें आप इसे आदत ना बनाने दें। वरना बच्चा सिर्फ प्रोत्साहन पाने के लिए आपकी बात मानेगा।
जैसे इन दिनो खूब देखने को मिलता है कि अक्सर माता पिता अच्छे नंबर लाने से लेकर प्रतियोगिता मे सफल होने पर ये लाकर देगे वो मांग पूरी कर देंगे जैसे लालच दे देते हैं, अक्सर बच्चे उस लालच में मेहनत से काम करते हैं लेकिन मांग पूरी न होते देख उग्र हो जाते हैं। बच्चो को ऐसे लालच देने से बचें।

योजनाएं तो हैं पर जानकारी नहीं है..महिलाएं बैंक जाएं उनके लिए भी है बहुत कुछ


महिलाओं के लिए बहुत कुछ बैंक के खाते में 
पूजा मेहरोत्रा
महिलाएं बचत करने में माहिर होती हैं। कम खर्च में घर चलाने से लेकर मेहमान नवाजी तक, बच्‍चों की फीस से लेकर बीमारी तक हर काम आसानी से हो जाए और कुछ पैसे रेनी डेज के लिए बच जाएं उसके लिए हर संभव कोशिश में लगी रहती हैं। महिलाओं की बचत की इस आदत को बैंक बखूबी जानते हैं। शायद यही वजह है अधिक से अधिक महिलाओं को बैंक तक लाने के लिए बैंक ने उनके लिए विशेष एकाउंट से लेकर लोन तक की सुविधाएं दे रहे हैं।
वुमन इंपावरमेंट के लिए सरकार बैंकों के साथ मिलकर भी कई योजनाएं चला रही है। जिसमें महिलाओं के जीरो बैलेंस पर एकाउंट खोलने से लेकर अपना व्‍यवसाय शुरू करने की इच्‍छुक महिलाओं को लोन उपलब्‍ध करवाने, एटीएम कार्ड, शॉपिंग, खाने पीने से लेकर मैक्सिमम ट्रांजैक्‍शन आदि तक की सुविधाएं मुहैया करा ही रही है साथ ही बच्‍चों के लिए एकाउंट खोलने की सुविधा दे रही है। अधिक से अधिक महिलाएं बैंक की इन योजनाओं के बारे में जानें और इन योजनाओं का लाभ उनतक पहुंचे इसके लिए जागरूकताा कैंपेन भी चलाती रहती है। बैंक इन योजनाओं का नाम भी महिलाओं के नाम पर ही चला रही है। लेकिन क्‍या सचमुच इन सभी सुविधाओं का फायदा महिलाओं तक पहुंच रहा है या महिलाओं को इसकी जानकारी है।
बैंक एकाउंट खोलने के लिए
 एकाउंट खोलने का प्रोसिजर लगभग हर बैंक का एक सा ही है। बैंक एकाउंट खोलने के लिए ,एड्रेस प्रूफ, फोटो आई काड , पैन कार्ड की आवश्‍यकता होती है। पहचान पत्र के और एड्रेस प्रूफ के लिए वोटर आईडी, राशन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट और बिजली बिल आदि की जरूरत होती है। बैंक समय समय पर अपना टार्गेट पूरा करने के लिए साल में एक या दो बार जीरो बैलेंस एकाउंट खोलने की सुविधा भी मुहैया कराता है। वैसे महिला एकाउंट खोले जाने का प्रोसेस भी जनरल एकाउंट की तरह ही होता है, यहां तक कि डिपोजिट भी। बैंक की पॉलिसी के हिसाब से अधिकतर सरकारी बैंक कि डिपोजिट राशि कम ही होती है जबकि निजी बैंक पांच से दस हजार रुपए तक डिपोजिट रखने की बात करते हैं। वैसे सभी बैंक बीच बीच में जीरो बैलेंस एकाउंट स्‍कीम भी चलाते है। इस योजना के तहत महिलाओं को एकाउंट में निश्चित राशि रखने की बाध्‍यता नहीं होती है।
महिला एकाउंट की सुविधाएं
चूंकि घर की सारी खरीददारी की जिम्‍मेदारी महिलाओं पर ही होती है इसलिए अधिक से अधिक महिलाओं को आकर्षित करने के लिए बैंक महिलाओं के विशेष एकाउंट और एटीएम कार्ड पर खरीददारी के लिए कई तरह की योजनाएं और सुविधाएं भी देते हैं।   
अधिक से अधिक शॉपिंग में डिस्‍काउंट के साथ, कैश बैक ऑफर और डाइनिंग में भी डिस्‍काउंट मुहैया कराती है।
 कुछ बैंक महिला एकाउंट के साथ 18 साल से कम उम्र के बच्‍चों के लिए अलग से एकाउंट खोलने की सुविधा भी देती हैं।
साथ ही बैंक किसी भी एटीएम से ट्राजैंक्‍शन की निशुल्‍क सुविधा के साथ, बीमा की सुविधा भी दे रही हैं।
 क्‍यों पॉपुलर नहीं हैं महिलाओं की बैंक योजनाएं
बैंको द्वारा महिलाओं के लिए कई लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन बैंक प्रशासन उन योजनाओं के प्रचार प्रसार पर खास ध्‍यान नहीं देती है जिसकी वजह से योजनाओं की जानकारी आम महिलाओं की पहुंच से थोड़ी दूर है और बैंक द्वारा दिए जा रहें लाभ से भी दूर हैं।
बैंक महिलाओं के विशेष बचत खाते पर 0.25 परसेंट तक ब्‍याज बढा कर देना होता है। वहीं लोन पर भी साधारण ब्‍याज की तुलना में महिलाओं को लोन के ब्‍याज में 0.25 से 0.50 परसेंट तक सब्सिडी अधिक दी जाती है।
महिलाओं के लिए बैंक द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी आम और जरूरतमंद महिलाओं तक तक कभी पहुंच ही नहीं पाती है।
अक्‍सर बैंक इन खातों और लोन की जानकारी महिला दिवस पर वुमन इंपावरमेंट के नाम पर जारी करते हैं और फिर गायब हो जाते हैं।
देश में महिलाओं को छोड दीजिए पुरुष भी फाइनेंसियल मामलों में जागरूक नहीं है या यूं कहें कि समझ नहीं रखते हैं। अगर उन्‍हें यह पता नहीं है कि बैंक के पास उनकी जरूरतों के हिसाब से क्‍या क्‍या योजनाएं हैं और उससे उन्‍हें क्‍या फायदा हो सकता है तो वे उसका फायदा कैसे लेंगे।
बैंक भी अपनी उन्‍हीं योजनाओं का प्रचार प्रसार करता है जिसमें उसे अधिक से अधिक फायदा होता है। जबकि बैंक को और आरबीआई को यह चाहिए कि वह बैंक को उन योजनाओं ब्रांच में ही नहीं बल्कि पोस्‍टर व बैनर के द्वारा प्रचार प्रसार वह इंगिलिश, हिंदी के अलावा लोकल लैंग्‍वेज में भी करे।  वेबसाइट पर दी जानेवाली जानकारी में विशेषतौर पर महिलाओं के लिए दी जा रही सुविधाओं को भी बहुत हाइलाइट नहीं किया गया है।
बैंकों की महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं
विजया बैंक की वी स्‍वशक्ति और वी मंगला
 वी स्‍वशक्ति
विजया बैंक कई वर्षों से महिला उद़यमियों के लिए और उन महिलाओं के लिए जो छोटे व्‍यवसाय शुरू करना चा‍हती हैं उनके लिए ‘वी स्‍वशक्ति’ योजना चला रहा है। जिसके अंतर्गत छोटे व्‍यवसाय और रोजगार शुरू करने के लिए लोन मुहैया कराती है। बैंक टेलरिंग, कैटरिंग, कैंटीन, अचार, मसाला बनाने से लेकर क्‍लीनिक, पापड़ बनाने तक, ब्‍यूटी पार्लर, क्रेच, प्‍ले स्‍कूल, टय़ूशन, कोचिंग क्‍लासेज, लाइब्रेरी, सिरेमिक आदि के साथ, डिर्पाटमेंटल स्‍टोर, हैंडी क्राफट, मेडिकल शॉप, काउंसिलिंग, कैंडिल मेकिंग, हेल्‍थ सेंटर, लांड्री, बेकरी, ट्रेवल एजेंसी आदि के लिए लोन देती है।
बैंक किसे देगी लोन
वी शक्ति लोन के लिए महिला की आयु 18 साल या उससे अधिक होनी चाहिए।
शिक्षा अनिवार्य नहीं है। यह लोन सुविधा उन्‍हीं महिलाओं को बैंक देता है जिनका बिजया बैंक में पहले से एकाउंट होता है।
 महिला एकाउंट हो या फिर जनरल एकाउंट।  
 जिस महिला ने लोन अप्‍लाई किया है उसका बैंक में एकाउंट नहीं है तो बैंक के नियम के अनुसार पहले उन्‍हें बैंक में एकाउंट खुलवाना होगा और कई महीने तक इसमें एक नियम के तहत मिनिमम बैलेंस मेंटेंन करने की बात भी कही जाती है।
बैंक महिलाओं को यह लोन मा‍लिकाना हक और पार्टनरशिप फर्म के लिए भी देता है। नियम के अनुसार बैंक यह लोन महिला को तभी देता है जब संबंधित पार्टनशिप व्‍यवसाय में उसकी पार्टनरशिप कम से कम 51 फीसदी होनी चाहिए।
इस योजना के अंतर्गत बैंक अधिकतम पांच लाख रुपए तक लोन देती है। बैंक कंपनी और मशीनरी के सारे पेपर अपने पास रेहन के रूप में रख लेती है। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इस योजना में बैंक किसी तरह के गारंटर की मांग नहीं करता है।
वी मंगला
बैंक ने वी मंगला लोन कामकाजी महिलाओं को ध्‍यान में रखकर डिजाइन किया है। इस लोन के तहत बैंक महिलाओं को कार, जूलरी, और दुपहिया खरीदने के लिए लोन देती है।
अधिकतम लोन तीन लाख तक का होता है या 15 महीने की ग्रास सैलरी जो भी हो उसके बराबर का लोन दिया जाता है।
इस लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस लोन पर ब्‍याज की दर साधारण ब्‍याज दर से एक फीसदी कम होती है। इसके अलावा महिलाओं के लिए मुफत क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी मुहैया कराती है। इसपर कोई अतिरिक्‍त चार्ज नहीं देना पड़ता है।
लोन के साथ इंश्‍योरेंस कवर भी दिया जाता है ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में लोन की राशि बीमा से पूरी की जा सके।
स्‍टेट बैंक आफ इंडिया का स्‍त्री पैकेज-
 बैंक अपनी एकाउंट धारक महिला ग्राहकों के लिए लोन के इंटरेस्‍ट रेट में 0.25 परसेंट तक की विशेष रियायत देता है। इस लोन का मकसद सिर्फ महिलाओं को इं‍डीपेंडेंट बनाने में मदद करना है। पांच लाख तक के लोन पर बैंक महिलाओं से किसी तरह के कोलेटरल सिक्‍योरिटी भी नहीं लेता है। प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट के साथ आई कार्ड और एड्रेस प्रूफ पर लोन मुहैया कराता है।
बैंक ऑफ इंडिया की प्रियदर्शनी योजना-
बैंक महिलाओं को लोन की सुविधा लघु, मंझोले और कुटीर उदयोग की शुरुआत करने के लिए मुहैया कराता है। बैंक दो लाख तक महिलाओं को लोन देता है और इसकी ब्‍याज दरें साधारण ब्‍याज दरों की तुलना में एक फीसदी कम होती है
बैंक ऑफ बडौदा
वैभव लक्ष्‍मी
बैंक महिलाओं के लिए समय समय पर जीरो बैलेंस एकाउंट खोलता है। यदि महिला काम काजी नहीं और खुद का काम शुरू करना चाहती है तो लोन की विशेष सुविधा मुहैया कराता है। प्रोजेक्‍ट के आधार पर बैंक लोन भी देती है। लोन की राशि प्रोजेक्‍ट के आधार पर ही तय की जाती है। लेकिन बैंक लोन देने के लिए एक गारंटर मांगती है। जबकि महिलाओं के एजूकेशन लोन पर साधारण ब्‍याज दर की तुलना में महिलाओ को एक फीसदी की छूट भी देती है। इस बैंक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अपनी वैभव लक्ष्‍मी स्‍कीम के तहत महिलाओं को घर के जरूरी सामान की खरीददारी के लिए भी लोन देती है। यह लोन पर्सनल लोन की तरह होता है।
केनरा बैंक
केन महिला
बैंक 18 से 55 वर्ष की महिलाओं को लोन मुहैया कराती है। इस स्‍कीम के तहत महिलाएं घर के जरूरी सामान के साथ सोना, जूलरी, कंप्‍यूटर आदि तक खरीदने के लिए लोन ले सकती हैं। बैंक लोन की सुविधा हाउस वाइफ, वर्किंग और इंडीपेंडेंट महिलाओं को देती है।
ओरिएंटल बैंक आफ कॉमर्स
महिला विकास योजना
यह बैंक महिलाओं को सबसे अधिक राशि यानि दो लाख से लेकर 10 लाख तक की राशि का लोन मुहैया कराता है। यही नहीं महिलाओ ंको ब्‍याज दरों में दो प्रतिशत की छूट भी देता है। 10 लाख से अधिक का लोन लेने पर एक फीसदी तक की छूट दी जाती है। यदि लोन दो लोग मिल कर ले रहे हैं जिसमें एक पुरुष है तो काम में महिला की हिस्‍सेदारी कम से कम 51 फीसदी होनी ही चाहिए। कंडीशन बस एक है कि लोन सात वर्षों में चुकाना होता है।
सिंडीकेट बैक
सिंड महिला शक्ति
सिंडिकेट बैंक महिला की सशक्तिकरण के लिए इस योजना की शुरुआत की है। जिसके तहत उन्‍हें देशभर में 20000 महिला व्‍यवसायियों को लोन देना है। जिसमें महिलाएं माइक्रो, स्‍मॉल और मिडियम आकार के व्‍यवसाय शुरू कर सकती हैं। इस योजना के तहत बैंक महिलाओं को कनशेसनल रेट पर पांच करोड़ तक लोन मुहैया करा रही है। यदि महिला 10 लाख तक का लोन लेती है तो उसे 10;25 परसेंट की दर से ब्‍याज देना होता और जैसे ही लोन की राशि 10 लाख से अधिक होती है .025 परसेंट की छूट मिलती है। लोन का मार्जिन 15 परशेट लोन लेने वाले को खुद ही देना पड़ता है।
इस लोन सुविधा के साथ क्रेडिट कार्ड की सुविधा के साथ ग्‍लोबल डेब्टि कार्ड, एटीमकार्ड, एसएमएस बैंकिंग के साथ सिंड सुरक्षा इंश्‍योरेंस भी मुहैया करा रही है।  यह लोन सात से दस वर्शों के लिए मिलता है।
निजी बैंक
आइसीआईसीआइ
का महिला एडवांटेज वुमन एकाउंट
बैंक का मकसद एक एकाउंट के माध्‍यम से महिलाओं को इंडीपेंडेंट बनाना है। इसलिए बैंक एकाउंट खोले जाने के साथ ही महिलाओं को कई प्रकार की सुविधाएं मुहैया करा रहा है। महानगरों में महिला को एकाउंट को मेंटेन करने के लिए 10000 रुपए रखने होते हैं जबकि सेमी अरबन सिटी में 5000 और गांवों में और भी घट जाती है।
बैंक एकाउंट के साथ ही डेबिट कार्ड देता है जो शॉपिंग और सेंविंग दोनों में ही महिलाओं की सेविंग की आदत को ध्‍यान में रखकर बनाया गया है। कभी कभी बैंक इस योजना के तहत जीरो बैलेंस की योजना भी लाती है। यदि महिला बचत प्रेमी है तो इस एकाउंट के साथ 2000 रुपए तक का रिकरिंग डिपोजिट भी शुरू कर सकती हैं। योजना के तहत विशेष इंतराष्‍ट्रीय महिला डेबिट कार्ड दिया जाता है। जिससे कार्ड धारक महिला एक दिन में 25000 तक खर्च कर सकती है।
एचडीएफसी बैंक
एचडीएफसी बैंक वुमन एकाउंट होल्‍डर महिलाओं को इजी शॉप वुमेंस एडवांटेज कार्ड और लॉकर की सुविधा देता है। इसमें 200 रुपए की खरीदारी पर एक रुपया कैश बैक देता है। जबकि इस एकाउंट के साथ सबसे बड़ी सुविधा यह है कि इस कार्ड से किसी भी बैंक के एटीएम से कितनी भी बार पैसा निकाला जा सकता है। 
 इस योजना के तहत एक निश्चित राशि की खरीदारी के बाद महिला उपभोक्‍ता को कुछ परसेंट पैसा वापस मिल जाता है।
साथ ही एक साल तक लॉकर की सुविधा पर 50 परसेंट की छूट गोल्‍ड बार की खरीद पर देता है। बैंक वुमन बिलों पर पांच परसेंट कैश बैक और 150 रुपए के खर्च पर एक रिवॉर्ड प्‍वाइट भी देता है। यदि बैंक से महिलाएं किसी उघेग के लिए लोन लेती हैं तो उन्‍हे ब्‍याज दरों में 0 दशमलव 25 फीसदी से लेकर 1 परसेंट तक की छूट दी जाती है।
स्‍टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर
महिलाओं को महज 250 रुपए के मिनिमम बैलेंस के साथ बचत खाता खोलने की सुविधा दे रहा है। साथ ही पांच से सात साल के लिए दिए जाने वाले 25 लाख तक के लोन पर ब्‍याज में आकर्षक छूट भी देता है।
बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र महिलाओं के लिए कम ब्‍याज दर पर लोन, लंबी भुगतान अवधि और कम मार्जिन जैसी सुविधाएं दे रहा है।  
पंजाब नेशनल बैंक
पीएनबी महिला उदयम निधि स्‍कीम, पीएनबी महिला सम़दिध योजना, स्‍कीम फॉर फाइनेंसिंग क्रेच, पीएनबी कल्‍याणी  कार्ड स्‍कीम, पीएनबी महिला सशक्तिकरण अभियान के तहत योजनाएं चला रही हैं
सुकन्‍या योजना है जिसमें 3 से बच्‍ची के 18 साल तक होने पर अभिभावक मैक्सिमम डेढ लाख रुपए तक एक साल में रुपए जमा कर सकते हैं। यह पैसे बेटी के बड़े होने पर उसकी पढाई, उधोग स्‍थापित करने में उपयोग किया जा सकता है। पीएनबी विमन इंपावरमेंट के लिए कई योजनाएं चला रहा है जिसमें वह बांस की डलिया बनाने से लेकर हवाई जहाज उघोग स्‍थापित करने तक के लिए लोन की सुवधिा यानी 5000 हजार से लेकर पांच हजार करोड़ तक का लोन देना है।
पांच से 25 हजार तक का लोन महिलाओं को एड्रेस प्रूफ और आइडेंटिटी कार्ड पर मुहैया कराया जाता है। इसके लिए बैंक कोई अन्‍य पेपर की मांग नहीं करती है। इसके लिए बैंक मैनेजर और एरिया के प्रतिनिध अहम रोल अदा करते हैं।
जबकि उससे अधिक राशि के लोन के लिए उघोग का प्रोजेक्‍ट से लेकर, महिला कितनी सक्षम है, उसके पास क्‍या क्‍या साधन है वह सब भी देखा जाता है।
सरकार की मुद्रा स्‍कीम
यह लोन खासकर अनऑर्गेनाइज्‍ड सेक्‍टर की महिलाओं को ध्‍यान में रखकर सरकार ने बनाया है जिसे हर बैंक को लागू करना आवश्‍यक है। इस स्‍कीम के तहत घर से उघोग चलाने वालों को बैंक 50,000 से दस लाख तक का लोन देता है।
इस स्‍कीम के तहत डिग्री डिप्‍लोमा की आवश्‍यकता नहीं होती है
गारंटर की जरूरत भी नहीं होती है।
बैंक इस उघोग के प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट को बहुत बारीकी से देखता है जिसमें पैनी नजर उन बातों पर होती है कि लोन लेने वाला अपना सारा खर्च निकालने के बाद ब्‍याज की राशि किस तरह से अदा कर पाएगा।
इस तरह के लोन में प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट बहुत अहम रोल अदा करता है।
जब लोन लेने जाएं तो पेपर क्‍या हो आपके साथ
आप लोन लेने जा रहे हैं तो उसका पूरा प्रोजेक्‍ट प्रॉफिट रिपोर्ट के साथ बनाएं
जहां उघोग लगाना है वहां आपका अपना मकान या आफिस या किराए का मकान है उसकी एग्रीमेंट की कॉपी
आपके क्‍वालीफिकेशन की डिग्री, जिस उधोग को आप लगाने जा रहे हैं उसकी डिग्री
एप्लीकेशन फॉर्म
बचत खाता है या करंट एकाउंट है उसकी तीन से छह महीने की एकाउंट बैलेंस
नो योर कस्‍टमर
फोटोग्राफ
एड्रेस प्रूफ
आइडेंटिटी कार्ड
सरकार की योजना के तहत सीजीटीएमसी (क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्‍ट फॉर माइक्रो एंड स्‍मॉल इंटरप्राइजेज) योजना है जिसमें बैंक एक करोड़ रुपए तक लोन देता है वह भी बिना गारंटर के।
महिलाओं की योजनाओं पर आरबीआई की गाइडलाइन
पब्लिक सेक्‍टर बैंक के लिए आरबीआई ने एक गाइड लाइन जारी की है। जिसके अंतर्गत सभी बैंक को महिला इंपावरमेंट के लिए टोटल लोन टार्गेट का पांच परसेंट सिर्फ महिलाओं को देकर पूरा करना है। आरबीआई ने यह गाइड लाइन 2001 में ही लागू की थी लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि आज तक  बैंक लक्ष्‍य को पूरा करने में असमर्थ दिखाई देते हैं। जब संवाददाता ने विभिन्‍न बैंकों से वुमन एकाउंट और महिलाओं को दिए गए लोन की जानकारी चाही तो बैंक ने असमर्थता जताई।
बैंकों के लिए गठित संसदीय समिति ने महिलाओं को दिए जाने वाले लोन पर विशेष रियायत देने की सिफारिश भी की है। लेकिन उस गाइडलाइन का कितना पालन हो पा रहा है।
अधिक से अधिक महिलाएं बैंक तक आएं इसलिए अब निजी बैंक और सरकारी बैंक महिलाओं के विशेष ब्रांच खेाल रहे हैं। एचडीएफसी बैंक छह मेट्रो सिटीज में एक एक विशेष ब्रांच खोल रहा है जबकि बिहार की राजधानी पटना के आशियाना नगर में एचडीएफसी की विशेष ब्रांच खुल चुकी है

जबकि पंजाब नेशनल बैंक की विशेष महिला ब्रांच दिल्‍ली के विकासपुरी इलाके में खोली गई है। इस ब्रांच में महिलाओं की हर छोटी बड़ी सुवधिा का ध्‍यान रखा जाता है। 

Sunday, 22 November 2015

तुम जियाे हजारों साल..... साल के दिन कभी खतम ही न हों....

बड़ा खास दिन है। अगर ये दिन न होता तो हम न होते। हम ये दुनिया न देख पाते। जिंदगी क्या है और उसकी मुश्किलें क्या हैं - न जान पाते। इन मुशिकलों से कैसे निकलना है सीख न पाते।

 जिंदगी आसान तो कभी नहीं होती। हर कदम पर लगता है बस अब और नहीं लेकिन हर समय बदलता है... मुश्किलों से निकलना आप तभी सीख पाते हैं जब  आपमें हिम्मत हो..हिम्मत यानि आपके अभिभावक.. अगर आप किसान के परिवार से आते हो ता जिंदगी से लड़ना तो बचपन में ही आ जाता है...समय किसान के बच्चों को बचपन में ही बड़ा बना देता है। गुड्डा गुड़िया.. तो देख भी लें लेकिन कई ऐसी चीजें हैं जिसके बिना ही आपको जीना है यह आपको समय ही बता देता है ..आठ साल की उमर् में ही २० साल वालों जैसी अक्ल आ जाती है ..हर छोटी छोटी ख्वाहिशों के पूरा होने में ऐसे दम निकला करता है जैसे....हर बदलते मौसम में फसलों पर होते हैं आपके सपने और वे भी तब धुल जाते हैं जब उनपर आंधी तुफान पानी फेर जाता था। फिर आपके सपने अगले मौसम और फसल पर निर्भर हो जाते हैं। इन ख्वाबों के टूटने बिखरने के बीच जो कभी नहीं टूटती है वह हैं उम्मींदें...इसकी वजह होते हैं आपके पापा और मां। मुश्किल से मुशकिल दौर निकलता ही जाता है और निकल ही गया.. आप सोचते हैं शायद अब कठिन समय बीत गया है। अब शायद मुश्किलें थक गईं है लेकिन जिंदगी में अचानक एक ऐसा पल आता है और कहता है गलत। मुश्किलें तो अब शुरू होती हैं..
 जिंदगी है तो मुश्किलें हैं।

सोचा था कुछ अलग करुंगी..कर भी रही थी...किसी ने नहीं सोचा था कि मैं दिल्ली आउंगी और पीछे पलटूंगी ही नहीं. पत्रकार ये क्या होता है?? तेज तरार्र बिटिया और उससे जुड़ी डॉक्टर, इंजीनियर बनने की और उसके बाद आइएएस बनने की उम्मींदे..सब तोड़ ही दिया था मैनें.. लालू यादव युग में आइएएस की स्थिति ने ..उफ्फ...पर विश्वास था खुदपर और आपदोनो की दी हुई हिम्मत पर। कुछ अलग की सोच ने पत्रकार बना दिया...मैनें कई कई बार साबित भी किया की मैं गलत नहीं हू...लेकिन शायद हार से मेरा नाता पुराना है...जब जब सोचती हूं शायद परीक्षा की घड़ी खतम हो गई है तभी एक ऐसी कठिन परीक्षा सामने खड़ी होती है कि ... जिंदगी में ऐसा आंधी तुफान आया है कि रुक ही नहीं रहा है..कई मौसम आए और गए। हर मौसम की फसल ने धोखा ही दिया है..दुख तब गहरा हो गया जब सूखी फसल पर शुभचिंतको नें कभी पानी डाल दिया तो कभी आग ही लगा दी...लेकिन उम्मीद को टूटने नहीं दिया है।
हर ख्वाहिश पर दम निकलने निकलने को होता है लेकिन आपका चेहरा आपकी सीख हमेशा कानों में गूंजती रहती है..आपने कहा-
 सूरज न बन पाए तो बन कर दीपक चलता चल...
आपने कहा दुश्मन ताकतवरो के ही होते हैं..
समय मजबूत लोगों की ही परीक्षा लेता है..
कमजोर तो हमेशा दूसरो के काम बिगाड़ने में लगे होते हैं...
आपने कहा बकरी के बच्चे को तभी तक टोकरी के नीचे रखा जा सकता है जब तक बच्चे में ताकत नहीं होती है..जिन दिन बच्चा ताकतवर हो जाता है उसके बाद उसे टोकरी में रखना मुशकिल ही नहीं नामुमकिन है ..
.ठीक है सारी बातें..अमल भी कर रही हूं लेकिन समय शायद हराने को तैयार है जब समय पर जीत हांसिल कर लेती हूं तो दोस्त और शुभचिंतक रूपी दानव मुंह बाए सामने खड़े मिल जाते हैं जो लहलहाती फसल उजाड़ देते हैं। इनसे कैसे बचूं?

आपको देखा है रात रात भर जागते हुए..हमारे सपनों के लिए सिक्के जोड़ते हुए...आज जब समय हमें हराने को तैयार है तो मैनें भी उम्मीद न छोड़ते हुए कहना सीख लिया है...कुछ न कुछ नही जो भी होगा बढ़िया ही होगा...इस खास दिन पर मैं कहना चाहती हूं कि हम चारों भाग्यशाली हैं। हमारे सिर पर आपका आशिर्वाद रूपी हाथ हैं। जन्मदिन की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं..तुम जिया हजारों साल...साल के दिन कभी खतम ही न हों...
 

Saturday, 17 October 2015

मैं आजकल केवट के रोल में ही हूं

राम लीला चल रही है. दिल्ली में चल रही रामलीला इसबार बॉलीवुड के कलाकार भाग ले रहे हैं. पिछले दिनों पूर्वी दिल्ली से  सांसद, गायक और अभिनेता मनोज तिवारी से मुलाकात करने का मौका मिला बड़े प्यार से कहा रील हो या रीयल मैं ‘केवट’ यानी सेवक ही हूं- 


दिल्ली की रामलीला में इसबार फिल्मी तड़का लगा है। भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता, गायक  सांसद मनोज तिवारी  रामलीला में केवट बन राम की नैया पार लगाएगें। लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में द्रोणाचार्य की भूमिका निभाने वाले सुरेंद्रपाल रावण की भूमिका में, मां वैष्‍णों धारावाहिक की मां बन चुकी रूपा दत्ता मां सीता के रूप में दिखेंगी।  बालीवुड अभिनेता रवि किशन -भरत, पॉप गायक शंकर साहनी -विभिषण, रजा मुराद -अहिरावण के पात्र में नजर आ रहे हैं। फिल्‍मी कलाकारों से भरी इस रामलीला का आयोजन 13से 23 अक्टूबर तक रामलीला मैदान में चल रहा है। 
भारतीय फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष पद को लेकर विवादों में आए गजेंद्र चौहान शंकर की भूमिका में नजर आएंगे। रामलीला में पात्र निभाने वाले फिल्मी सितारों की फेहरिस्त जरा लंबी है। इसमें शक्ति कपूर, हेमंत बिरजे, पुनीत इस्सर,असरानी समेत करीब एक दर्जन फिल्म व टेलीविजन से जुड़े कलाकार शामिल है।
सांसद मनोज तिवारी अपने किरदार के विषय में कहते हैं कि वो रील लाइफ हो या रीयल लाइफ दोनों में ही केवट की ही भूमिका में हैं। यही उनकी वास्तविक पहचान है। जनता, समाज, फिल्‍मी करियर और गायकी से जुड़े कई मनोरंजक लेकिन तीखे सवाल कर रहीं है पूजा मेहरोत्रा और वैसे ही चालाकी भरे जवाब दे रहे हैं मनोज तिवारी
रामलीला में आप केवट के रोल में नजर आएंगे?
मैं आजकल केवट के रोल में ही हूं। चाहें वह स्‍टेज हो या फिर जिंदगी। असल में काम सेवक का ही है। स्‍टेज पर राम जी का केवट बनूंगा रीयल लाइफ में जनता का सेवक हूं। हालांकि जो भूमिका मिले उसे तो सहज तरीके से निभाने की कोशिश करूंगा। डायलाग तो मंच पर बोलुंगा। गाना पहले से रिकार्ड होगा। 
 रामलीला के दौरान सबकुछ स्‍टेज पर हजारों लोगों के सामने, रिहर्सल की जरुरत पड़ेगी?
हां, निश्चित तौर पर मैं तैयारी करूंगा।  मुझे अन्य पात्रों के साथ तैयारी करनी होगी। संवाद वगैरह सारे। जहां तक स्‍टेज पर लाइव पर फॉरमेंस की बात है तो मैं आपको बता दूं कि मैं मात्र तीन सालों से ही मंच से दूर हूं। मैं हर वर्ष अपने गांव में रामलीला कराता हूं और पात्र भी निभाता हूं। जब मुझे रामलीला के लिए अनुरोध किया गया तो मुझे हां करने में एक मिनट नहीं लगा, मुझे मेरा गांव याद आ गया। वह अहसास पैदा हुआ कि जैसे अभी रामायण उठाओ और पात्रों को जीओ। 
सांसद के तौर पर दिल्ली वाले आपसे परिचित है। अब आप सीधे तौर पर उनसे जुड़ेगे एक कलाकार के तौर पर आप इसे किस तरह लेते हैं?
दिल्ली के लोग मुझे और करीब से जान सकेंगे कि मनोज तिवारी एक कलाकार एक व्यक्ति के तौर पर कैसा है। वैसे, मैं खुद दिल्ली से लगातार जुड़ रहा हूं। दिल्‍ली और दिल्‍ली के लोगों की खासकर मेरे पूर्वी दिल्‍ली के लोगों को  समझने की कोशिश कर रहा हूं। 
दिल्‍ली पहले आप मेहमान के रूप में आते थे अब आप यहां सांसद है, क्‍या बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं
पहले दिल्‍ली से हिचक होती थी। अब दिल्‍ली मेरी लाइफ लाइन बन चुकी है। यहां का हर कुछ अलग है, सावन में कांवडि़या के लिए जितनी व्‍यवस्‍था होती है उतनी ही शबे बारात और जुमा पर भी व्‍यवस्‍था की जाती है। पूर्वी दिल्‍ली की बदहाली देखकर निराश हूं, बदलना है कुछ करना है। बहुत मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं है।
पूर्वी दिल्‍ली गंदगी और भीड़ भाड़ वाली जगह है और यही इसकी सबसे बड़ी परेशानी भी है, क्‍या कुछ नया करने की कोशिश है
पूर्वी दिल्‍ली के लिए एक सेंट्रल स्‍कूल पास कराया है। डीडीए ने पिछले चार महीने से जमीन नहीं दी है जहां काम शुरू हो सके। 119 जगहों पर अनऑथराइज्‍ड कब्‍जा है। चूंकि वोट बैंक है तो नेता उन कब्‍जा वाली जगह पर हाथ नहीं डालता है लेकिन मैंने सोच लिया है भले ही मुझे हरा दें अगले चुनाव में लेकिन मैं कुछ अलग करूंगा। मुझे सिर्फ गायक और अभिनेता न समझें अभि से हटकर मैं नेता ही हूं। मैं अपनी पूरी ताकत लगा दूंगा। बदलाव की शुरुआत कर दी है।
अक्‍रस जीत के बाद अभिनेताओं और सेलिब्रिटी अपने एरिया से गायब हो जाते है
जी मैं हर चौथे दिन अपने क्षेत्र के किसी न किसी वार्ड में मिलता हूं।मिलूंगा। शुकून मिलता है। मैं जो भी हूं इन्‍हीं लोगों की वजह से हूं गायक, नेता या फिर अभिनेता। कुछ तो समाज के लिए करूंगा ही ।
आप लोगो का खर्च बहुत होता है क्‍या सांसद निधि से काम चल जा रहा है
जी आपने दुखती रक्‍त पर हाथ रख दिया है। बहुत मुश्किल में हो गया है गुजारा। सांसद निधि और हमलोग को जितनी सैलरी मिलती है उससे चौगुना खर्च है हमारा। अगर ईमानदारी से काम करना है औश्र समाज को कुछ देना है तो नाचना गाना और अभिनय करके अपना खर्च भी निकालना पड़ता है और आम जनता की इसी से मदद भी करते हैं। अक्‍सर हम कलाकारों को लोग नेता बनने क ेबाद कुछ अलग अंदाज से देखते हैं। नहीं हम अपना खर्चा नेता बनने के बाद भी स्‍टेज शो करके या फिल्‍मों में काम करके ही निकालते हैं।
रील लाइफ का जनप्रतिनिधि और रीयल लाइफ के जनप्रतिनिधि मे कितना फर्क है?
मैं अपनी तरफ से रीयल लाइफ के जनप्रतिनिधि के साथ तो न्याय करने की पूरी कोशिश में हूं। मेरा मोबाइल नंबर हमारे क्षेत्र में हर किसी के पास है। मैं सभी से कहता हूं मुझे फोन करो और समस्‍या बताओ। हर दिन लगभग दस हजार फोन आता है। मैं बिना सुरक्षा के ही निकलता हूं। ताकि जान सकूं कि आम जनता सड़क पर किन किन समस्‍या का सामना कर रहा है। 

Monday, 28 September 2015

साथी हाथ बढ़ाना

जिंदगी का मोल इमरजेंसी के हालात समझाते हैं। किसी हादसे, एक्सिडेंट या अचानक दौरा पड़ जाने जैसे हालात में जानलेवा बन जाते हैं। जब वक्त पर मदद नहीं मिलती। एक्सपर्ट्स की मदद से पूजा मेहरोत्रा बता रही हैं कि क्या करें जब कोई कर रहा हो मेडिकल इमरजेंसी का सामना :

जिंदगी में हादसा कभी भी कहीं भी हो सकता है। सड़क पर अक्सर एक्सिडेंट होते हैं, लोगों की तबियत बीच राह खराब हो जाती है। कई बार तो जान से हाथ धोने की नौबत आ जाती है। क्या मेडिकल इमरजेंसी के हालात में किसी की मदद करके उसकी जान पर आए संकट को टाला जा सकता है? मेडिकल साइंस का मानना है कि हां ऐसा किया जा सकता है। हम जरा से अलर्ट होकर बहुतों की मदद कर सकते हैं।

कहीं भी हो सकता है कुछ भी
इंसानी शरीर नेचरल बैलेंस का एक शानदार नमूना है। शरीर के भीतर से लेकर बाहर तक सब एक फाइन बैलेंस में चलता है। यह संतुलन जरा सा इधर से उधर हुआ और हादसा हो जाता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही परिस्थितियां जिनमें पड़ती है मदद की जरूरत : 

कार्डियक अरेस्ट (हार्ट फेल), एक्सिडेंट, अस्थमा अटैक, बेहोशी, पैनिक अटैक, मिरगी (फिट्स, एपलैप्सी) चोकिंग (खाना खाते वक्त या पानी पीते वक्त सांस की नली में कण के चले जाने पर सांस का रुक जाना), आगजनी के शिकार (बर्न), प्रेगनेंट लेडी को लेबर पेन शुरू हो जाना और किसी बुजुर्ग का बाथरूम में गिर जाने पर कूल्हे की हड्डी का टूट जाना। अक्सर ऐसी किसी भी घटना को देखकर हाथ-पांव फूल जाते हैं। ऐसी परिस्थिति को देख या तो लोग आगे नहीं आते और यदि कोई आगे आता भी है तो उन्हें पता नहीं होता कि करना क्या है। 
 
क्या हम ऐसे हालात के लिए तैयार हैं? क्या किसी का एक्सिडेंट हुआ है और हम आंख फेर कर आगे बढ़ जाएंगे या फिर हमें रुक कर उसकी मदद करनी चाहिए? उसका इलाज के लिए डॉक्टर बुलाने के साथ उसे सांत्वना देनी चाहिए कि सब ठीक है। अलर्ट हो जाइए और मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाइए लेकिन सावधानी से कि आपकी मेहनत रंग लाए और किसी की जान बच जाए।

हार्ट अटैक
लक्षण
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हार्ट अटैक होने पर चेस्ट की बाईं तरफ तेज दर्द, बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ होती है।
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जिसे अटैक आया हो, वह न तो ठीक से खड़ा हो पाता है और न ही बैठ पाता है। ऐसे में पता ही नहीं चलता कि करना क्या है।
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ऐसे समय में डॉक्टर और एंबुलेंस को फोन तो आप कर देते हैं लेकिन यही कुछ मिनट मरीज के लिए बहुत खास होते हैं।
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हार्ट फेल्योर में ब्लड प्रेशर कम हो जाता है और सांस फूलने लगती है।  
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हार्ट से जुड़े मामले में मरीज के पास चंद मिनट होते हैं। ऐसे में सबकुछ बहुत तेजी से समझते हुए एक्ट करना होता है।

क्या करें
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यदि ऐसी कोई घटना बस में, बाजार में, ऑफिस में, मॉर्निंग वॉक के दौरान सड़क पर चलते हुए घटती हुई देंखे तो सबसे पहले मरीज को लिटाएं।
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मदद के लिए एंबुलेंस को बुलाने के साथ डॉक्टर फोन पर भी सलाह दे देते हैं।
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मरीज का हौंसला बढ़ाने के साथ उसे रिलैक्स करने की कोशिश करें।
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यदि मरीज ने टाई और बेल्ट बांध रखी है तो उसे खोलें। देखें को मरीज ने बदन को कसने वाला कोई कपड़ा न पहना हो। जूता खोलें, मोजा भी हटा दें।
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महिला मरीज है तो उनके ब्रा का हुक खोल दें, साड़ी या सलवार का नाड़ा ढीला करें।
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मरीज को कुछ खिलाने-पिलाने की कोशिश न करें। हार्ट अटैक की स्थिति में कुछ भी पीने को नहीं देना है। यह घातक हो सकता है।
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अगर सिम्पटम हार्ट अटैक की ओर इशारा कर रहे हैं तभी पानी में घोल कर एसप्रिन दें।
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कार्डियक अरेस्ट
लक्षण

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इसमें इंसान अचानक बेहोश हो जाता है। गर्दन एक ओर लुढ़क जाती है। हाथ पैर ठंढे हो जाते हैं। धड़कन और सांस रुक जाती है।
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इसमें मरीज के हालात सुधारने के लिए महज 2 से 10 मिनट का वक्त होता है।
क्या करें
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कार्डियक अरेस्ट में मदद करने के लिहाज से सीपीआर10 नाम की टेक्निक सीखनी चाहिए। 
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सीपीआर10 एक जीवन रक्षक टेक्नीक है, जिसे कोई भी सीख सकता है। इसमें मुंह में मुंह लगाकर सांस देने की जरूरत भी नहीं होती है।
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फिर दोनों हाथों को मरीज के चेस्ट के बीचों बीच रखकर तेजी से सीपीआर10 दें। 
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इस तकनीक में चेस्ट के बीचों-बीच दोनों हाथ एक दूसरे के ऊपर रखकर बहुत तेजी से छाती पर धक्का मारना होता है।
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ऐसे में मरीज को फ्लोर पर सीधा लिटाएं, जिसमें उसका चेहरा छत की ओर होना चाहिए।
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जो भी सीपीआर परफॉर्म कर रहा है, उसकी कुहनी मुड़नी नही चाहिए और दोनों हाथ इंटरलॉक्ड होने चाहिए।
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हाथ का हथेली वाला भाग छाती के बीच में होना चाहिए, दूसरा उस हाथ के ऊपर हथेली की ओर ही रखा गया होना चाहिए।
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छाती को दबाने की रफ्तार प्रति मिनट 100 होने के साथ-साथ स्पीड तेज होनी चाहिए।
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यदि कोई सहायता के लिए हो तो हाथ और पैर की मालिश भी कराएं और मुंह से भी सांस जिसे रेस्क्यू ब्रीद भी कहते हैं दें।
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सीपीआर की तकनीक को अच्छी तरह समझने के लिए www.youtube.com/watch?v=Mo6XfFIbSEE पर जाएं।
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लगातार चेस्ट पर तेज हाथों से दिए जा रहे दवाब की वजह से मरीज की सांसे वापस आ जाती है और मरीज की जान बचने के चांस बढ़ जाते हैं।
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सीपीआर तकनीक का उपयोग करते समय ध्यान रखे कि इसे सिर्फ हार्ड सरफेस पर ही किया जाना चाहिए।
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रोड एक्सिडेंट
मेट्रोपॉलिटन सिटी से लेकर छोटे-बड़े शहरों में सभी जगह की सबसे बड़ी समस्या है सड़क दुर्घटना। लापरवाही और फर्स्ट एड की जानकारी न होने से कई जाने चली जाती हैं। एक्सिडेट से मौत के ज्यादातर केसेज में सबसे बड़ी वजह ज्यादा खून का बह जाना होता है। अगर जरा सी सावधानी बरतें और मेडिकल टीम और पुलिस के आने से पहले एक्सिडेंट के शिकार शख्स के बहते खून को रोकने की कोशिश करें तो किसी की जान बचाई जा सकती है।
क्या करें
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सबसे पहले दुर्घटना के शिकार इंसान के शरीर से बहने वाले खून को रोकने की कोशिश करनी चाहिए।
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शरीर के जिस अंग से खून बह रहा है, उसे साफ कपड़े से दवाब के साथ टाइट बाधें। इस बात का ध्यान रखें कि खून का बहाना बंद हो जाए।
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अगर कपड़ा नहीं है तो उस जगह को तब तक दबा कर रखें जब तक कि खून निकलना बंद न हो जाए।
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कोशिश करके 5-10 मिनट के भीतर एक्सिडेंट के शिकार शख्स को मेडिकल हेल्प दिलाने की कोशिश करें।
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अगर दिख रहा है कि हेड इंजरी है, तो आराम से मरीज को ज्यादा हिलाए-डुलाए बिना हार्ड प्लेस पर लिटाएं।
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बहुत सुविधा अगर नहीं मिल पा रही है तो मरीज का सबसे पहले पैर ऊपर कर दें, ब्लड प्रेशर को मेंटेंन करने के लिए हथेली और तलवे को रगड़े जिससे शरीर में गर्माहट बनी रहे।
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अगर स्पाइनल इंजरी है तो व्यक्ति को काफी सावधानी के साथ फ्लैट और हार्ड सरफेश पर लिटाएं।
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मरीज को ज्यादा हिलाने-डुलाने से बचना चाहिए।
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अगर एंबुलेंस या पुलिस मदद को नहीं आई है तब कार या टैक्सी में भी मरीज को लिटाकर ले जाने की ही कोशिश करें।
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यदि मरीज एक्सिडेंट में ठीक दिख रहा है। लेकिन उसका हाथ या पैर उठ नहीं रहा है और तेज दर्द है तो हो सकता है मरीज के शरीर में कहीं हड्डी टूटी हो।
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हाथ पैर में दर्द वाली जगह पर तो कस कर कपड़ा बांध देना चाहिए। अगर किसी लकड़ी का फट्टा या फिर कड़े प्लास्टिक का ही कुछ चपटा या स्टिक जैसी चीज मिल जाए तो उसे दर्द वाले हिस्से को बांध दें। इससे प्रभावित हिस्सा ज्यादा हिलेगा-डुलेगा नहीं। 
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कई बार एक्सिडेंट इतना दर्दनाक होता है, कि मरीज का अंग तक कट जाता है। डॉक्टर की सलाह है कि ऐसी स्थिति में मरीज के कटे अंग को बर्फ में रखकर मरीज के साथ ही डॉक्टर तक पहुंचाने की कोशिश करें।

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अस्थमा
बदलते मौसम में अक्सर अस्थमा के अटैक बढ़ जाता है। अस्थमा सांस की बीमारी है। इसमें सांस लेने वाली नलियों में सूजन आ जाती है जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। बदलते मौसम के साथ ठंढ के दौरान, पहाड़ों पर, एयर पॉलुशन की वजह से या फिर ज्यादा भीग जाने पर अस्थमा का अटैक होता है। पेशेंट की सांसे उखड़ने लगती है। कई बार मरीज को भी पता नहीं होता कि उन्हें अस्थमा अटैक हुआ है। कभी-कभी अटैक इतना तेज होता है कि पेशंट बेहोश हो जाता है या फिर सांस रुकने लग जाती है। अक्सर अस्थमा के मरीज अपनी बीमारी के बारे में जानते हैं और विपरीत परिस्थितियों के लिए तैयार भी रहते हैं। मुसीबत उन मरीजों के लिए ज्यादा होती है जिन्हें अपनी इस बीमारी के बारे मे पता नहीं होता।
यदि किसी को बाजार में, घूमने के दौरान, खेलने कूदने के दौरान, एग्जाम देते वक्त अस्थमा अटैक पड़ जाए तो :
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मरीज को रिलैक्स करने के साथ सबसे पहले उसके कपड़े ढीले करें।
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मरीज को सीधा बिठाएं, अस्थमा अटैक के दौरान मरीज को लिटाना कतई नहीं चाहिए।
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मरीज के आस-पास भीड़ न लगाएं और शांत रहें।
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कुछ खिलाने-पिलाने की कोशिश न करें। खाना-पानी सांस की नली में फंस सकता है और हालत ज्यादा बिगड़ सकती है।
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यदि मरीज बोल सकने की स्थिति में नहीं है तो जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से फोन पर या फिर पास के अस्पताल जाने की कोशिश करें।
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चोकिंग 
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खाने या पीने के दौरान सांस की नली में एक छोटा सा कण भी फंस जाए तब यह स्थिति पैदा हो जाती है। इसकी वजह से मरीज न तो सांस ले पाता है और न कुछ बोल ही पाता है।
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कई बार बच्चे खेल खेल में कुछ भी निगल लेते हैं। 
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बच्चों में चोकिंग की सबसे बड़ी शिकायत क्वाइन निगलने से होती है।
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बड़े लोगों में अक्सर खाने-पीने के दौरान हंसने-बोलने से खाना सांस की नली में चला जाता है और उसके बाद हालत नाजुक हो जाती है।
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चोकिंग के वक्त दिमाग को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और ऐसी स्थिति में कई बार मरीजों की जान पर बन आती है और मरीज बेहोश हो जाता है।

चोकिंग के लक्षण
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अक्सर बच्चे कुछ निगल लेते हैं तब और बड़े खाने पीने कुछ फंस जाने के दौरान पहले खुद, ख ख ख या फिर ह ह ह का साउंड निकाल कर ठीक होने की कोशिश करते देखे जाते हैं।
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गला सहलाते हैं। मामला तब गंभीर हो जाता है जब कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं होते और न ही सांस ले पाते हैं।
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ऐसी परिस्थिति में कई बार आंख से पानी तक निकलने लग जाता है। 
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अगर कुछ ज्यादा देर तक यही अवस्था रहती है तब मरीज के हाथ पैर के नाखून नीले और होंठ सूखने लगते हैं। मरीज कभी-कभी बेहोशी की हालत में पहुंच जाता है।

कैसे और क्या करें
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सबसे पहले यह समझना होगा कि गले में फंसा क्या है। अगर बच्चे ने सिक्का या कोई चीज निगल ली है तो गर्दन ऊपर न करें, अक्सर खाने-पीने के दौरान गले में कुछ फंसने पर हमें सलाह दी जाती है कि हम ऊपर देखें।
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बच्चे ने अगर कुछ निगल लिया है तो वह गर्दन ऊपर करने पर और फंस सकता है या फिर अंदर जा सकता है। ऐसे में स्थिति और खराब हो सकती है।
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ऐसी किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए सबसे पहले गर्दन के पीछे वाले हिस्से पर मुट्ठी बना कर धीमे-धीमे मुक्के मारना चाहिए।
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यदि स्थ्िाति ज्यादा गंभीर लग रही है तो उस इंसान के पीछे खड़े हो जाएं और उसके हाथ को उसकी कमर के आसपास ऐसे रखें की हाथ उससे लिपटा हुआ लगे। व्यक्ति को थोड़ा आगे की ओर झुकाते हुए उसकी नाभि के थोड़ा सा ऊपर अपने एक हाथ की मुट्ठी बना कर रखें और दूसरे हाथ से उस मुट्ठी को दबाएं। जैसे आप उसे उठाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा करने से कई बार गले में फंसी चीज सामान झटके से बाहर आ जाता है। अगर फिर भी न निकले तो मेडिकल हेल्प आने तक कोशिश करते रहें।

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आग लग जाने पर

जलने की घटना सिर्फ किचन में ही नही होती, बल्कि रोड एक्सिडेंट में कार में आग लग जाने की घटनाएं आम हो गई हैं। दीवाली के दौरान आगजनी और पटाखे की वजह से बहुत सारी घटनाएं इस तरह की दुर्घटनाओं की सुनने को मिल जाती है। 

क्या करें
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आग लग जाने और धुआं उठने की स्थिति में सबसे पहले जमीन में लेट जाना चाहिए। चूंकि धुआं ऊपर की तरफ उठता है, ऐसे में खड़े रहने से घुटन और सांस न ले पाने की समस्या पैदा हो सकती है।
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अगर आग ऑफ़िस, घर में या किसी मकान में लगी है तो खिड़की दरवाजे खोल देने चाहिए।
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यदि इस आगजनी में किसी के शरीर में आग लग गई हो तो उस पर पानी आदि न डाल कर किसी कंबल जैसी चीज में उसे लपेट कर आग बुझाने की कोशिश करनी चाहिए।
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सुरक्षित स्थान पर ले जाकर जल्द से जल्द शरीर से कपड़े निकाल दें। इससे शरीर को कम से कम नुकसान होगा।
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जलने वाले ने यदि अंगूठी, घड़ी, गहने या किसी भी मैटल का कुछ पहना रखा है तो उसे तुरंत निकाल दें। ये चीजें गर्म होकर शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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उसके बाद शरीर के जले हुए भाग और शरीर पर पानी डालना चाहिए। इससे जलने की गहराई खत्म होती है और दर्द भी कम होता है।

क्या न करें
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आग के बुझते ही शरीर पर पानी डालें, याद रखें बहुत ठंडा पानी न डालें। ऐसा करने से जान जाने का खतरा बना रहता है।
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कई बार लोग जले हुए अंग पर टूथपेस्ट, घी और तेल लगा देते हैं, बिल्कुल न लगाएं। इससे शरीर में इन्फेक्शन बढ़ने का खतरा बना रहता है।
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जली जगह पर सीधे बर्फ न रगड़े और ना ही फ्रिज का ठंडा पानी ही डालें।

बेहोशी
अक्सर किसी बड़ी दुर्घटना या फिर घर के बाहर किसी वजह से लोग बेहोश हो जाते हैं। ऐसे में भीड़ तो बहुत लग जाती है, लेकिन मदद के लिए आगे आए लोग एंबुलेंस और पुलिस का इंतजार करते रहते हैं। जब तक कोई मेडिकल हेल्प मिले हम मदद कर सकते हैं।
क्या करें
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सबसे पहले मरीज को हवादार और ठंडी जगह पर लिटाएं। अगर ठंड का मौसम है तो गर्म और हीटर वाली जगह पर लिटाएं।
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सबसे पहले बॉडी को टाइट कर रहे कपड़ों को हल्का करें, बेल्ट खोल दें, टाई लगाई है तो खोल दें, शर्ट के बटन खोल दें, जूता मोजा खोल दें।
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महिला के साथ भी बदन को कसने वाले कपड़ों को जैसे जींस और पैंट के बटन को खोल कर ढ़ीला करें, ब्रा का हुक खोल दें।
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किसी आराम दायक जगह पर ले जाकर पैरों को तकिया आदि का सहारा देकर ऊंचा कर दें।
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चिन (ठुढी को) को थोड़ा ऊपर उठा दें, इससे ब्लड सर्कुलेशन ऊपर की ओर जाता है।

क्या न करें
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आनन फानन में अक्सर लोग बेहोशी को फिट या मिरगी समझ कर जूता चप्पल सुंघाने लग जाते हैं। ऐसा बिल्कुल न करें।
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पानी या किसी तरह की पीने की सामग्री न दें। वह गले में फंस सकती है और सांस रुक सकती है।
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हाथ-पैरों पर नजर रखें, अगर ठंडे हो रहे हैं तो उन्हें गर्म रखने के लिए हाथ पैर की मसाज करें।
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सबकुछ ठीक है, आपको कुछ नहीं होगा, सब ठीक हो जाएगा जैसी बातें बोल कर सांत्वना दें और अगर मरीज बोलने की हालत में है तो उसकी परेशानी जानने की कोशिश करें।

 
मिरगी या इपलैप्सी
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मिरगी में अक्सर लोगों का शरीर अकड़ जाता है, मुंह से थूक निकलने लगता है। ऐसे में लोग मरीज को जूता सुंघाने, मारने पीटने तक लग जाते हैं। ऐसा बिलकुल नहीं करना है।
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पहले मरीज को आराम से लिटाएं।
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फिट्स आने पर अक्सर लोगों के दांत पर दांत चढ़ जाता है, जिससे जीभ कटने का भी खतरा रहता है।
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कुछ लोग ऐसी परिस्थिति में मुंह में उंगली डाल देते हैं। ऐसा न करके दातों के बीच चम्मच या ऐसा ही कुछ रखा जा सकता है। 
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मरीज अक्सर 4-5 मिनट में होश में आ जाता है। इस लिए बहुत घबराने की बात नहीं होती है। बस ये ध्यान रखना है कि बेहोशी के हालत में कुछ खिलाना-पिलाना नहीं है।

 
पेट में दर्द
कई बार ऑफिस में बैठे बैठे, बाजार में या रात में सोते हुए पेट में अचानक दर्द उठता है। दर्द इतना अधिक होता है कि लगता है जान निकल जाएगा। 
क्या करें
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अक्सर दर्द के दौरान लोग पानी पी लेते हैं। ऐसा न करें। 
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आराम से लेट जाएं। अगर डॉक्टर के पास जा सकते हैं तो जाएं नहीं तो एंबुलेंस को फोन करें।
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अगर घर में पेन किलर है तो Colic pain killer लें या फिर केमिस्ट से Drotin दवा मांगे।

 

प्रेगनेंट विमन और लेबर पेन (डिलीवरी)
पिछले कई दिनों से खबरें सुर्खियां बनती रही हैं कि कभी रेलवे स्टेशन पर, कभी मेट्रो में तो कभी मार्केट में प्रेगनेंट महिला को लेबर पेन शुरू हो गया। इतना वक्त भी नहीं मिला कि उसे हॉस्पिटल तक पहुंचाया जा सके। यह एक महिला और बच्चे दोनों के लिए नाजुक मौका होता है, इंफेक्शन के सबसे ज्यादा चांसेज होते हैं। ऐसे में मां और बच्चे को बचाना और अस्पताल तक सही सलामत पहुंचाना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है।
क्या करें
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ऐसी भी किसी परिस्थिति में महिलाएं बहुत घबरा जाती हैं, सबसे पहले महिला को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करें कि वह ठीक है और बच्चा भी सुरक्षित है।
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अगर भीड़ एकत्रित हो रही है है तो उसे वहां से हटाएं।
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अगर बच्चा बाहर आ गया है तो बहुत सावधानी से प्लासेटा में धागा बांध दें।
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बच्चे को गर्भनाल से अलग करने की कोशिश न करें, संक्रमण के चांसेज होते हैं
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अगर बच्चा बाहर आ गया है, तो सबसे पहले बच्चा का रोना जरूरी होता है। चूंकि नली बहुत बड़ी नहीं होती ऐसे में बच्चे को रुलाने की कोशिश करनी चाहिए।
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बच्चे को धीमें से चुटकी कांटे, पीठ पर थपथपाएं, अगर बच्चा रो दिया तो उसकी रेस्पेरिटरी सिस्टम शुरू हो जाएगा और फिर बच्चे की जान को खतरा नहीं रहता है।
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महिला से हो रही ब्लीडिंग को रोकने के लिए नली बांधनी जरूरी होती है। उसे पतले कपड़े, चिमटी या फिर रबड़ से भी बांधा जा सकता है।
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अगर मां बेहोश नहीं हुई है तो उसे पानी, शिकंजी पिलाया जा सकता है।
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इतनी देर में मेडिकल टीम या फिर एंबुलेंस करने की कोशिश करें।

पैनिक अटैक
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इन दिनों लोगों की सबसे बड़ी समस्या है असुरक्षा।
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जिसकी वजह से वे हर समय टेंशन में रहते हैं और उन्हें कभी भी पैनिक अटैक हो जाता है।
लक्षण
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सांस जल्दी-जल्दी आना, दिल का जोर-जोर से धड़कना और घबराहट होना, सीने में दर्द और डिस्कंमफर्ट, चक्कर आना, पसीना आना, वोमिटिंग और पेट खराब हो जाता, ऐसा महसूस होना कि बेहोश हो जाएंगे, शरीर में झनझनाहट होना, कभी ठंडा लगना कभी गर्मी लगना, डर लगना कि मर जाउंगा, शरीर पर नियंत्रण खो देना और ऐसा लगना कि अब कुछ नहीं बचा।
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पैनिक होने की बड़ी वजह व्यवहार में बदलाव और एंग्जाइटी भी हो सकती है जो अटैक की वजह बनते हैं।
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अगर लगे हाथ पैर कांप रहा है, गला सूख रहा है तो बैठ जाएं, गहरी सांस लें। दिल की धड़कन सामान्य होने दें। पानी पिएं। खुद को शांत करने के लिए ‘ऑल इज वेल’ सब ठीक है बोलें।
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ऐसी किसी भी परिस्थिति में सबसे पहले खुले स्थान में आए, गहरी लेकिन आराम से सांस लें। बदल को कसने वाले कपड़ों को ढीला करें। लेट जाएं। 
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